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महाकुंभ 2025

  महाकुंभ 2025: प्रयागराज में दिव्य संगम का आरंभ 13 जनवरी 2025 को प्रयागराज में महाकुंभ मेला शुरू हो गया है, यह दिन भारतीय हिंदू धर्म और संस्कृति के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है , क्योंकि इस दिन लाखों श्रद्धालु , संत , महात्मा और पर्यटक प्रयागराज के पवित्र संगम में एकत्र होंगे ।   महाकुंभ का आयोजन हर 12 साल में एक बार होता है , और इस बार यह आयोजन माघ मेला और पतंजलि के योग समारोह के साथ जुड़ा हुआ है। महाकुंभ केवल एक मेला नहीं है , बल्कि यह एक दिव्य यात्रा है , जो व्यक्ति को आंतरिक शांति और परमात्मा से जुड़ने का अवसर देती है। संगम पर पहुंचते ही , आस्था , श्रद्धा और भक्ति का सैलाब हर जगह देखा जाता है। यहां लोग अपनी जीवन की कठिनाइयों को पीछे छोड़कर एक नई शुरुआत की ओर बढ़ते हैं। महाकुंभ का महत्व और पवित्रता महाकुंभ का आयोजन उन स्थानों पर होता है , जहां पवित्र नदियाँ – गंगा , यमुन और सरस्वती मिलती हैं। इसे ‘ तीर्थराज ’ कहा जाता है। इस संगम मे...

मेरे मन की बात: रुपया बनाम डॉलर

  भारतीय रुपया और अमेरिकी डॉलर, ये दो ऐसी मुद्राएं हैं जिनका जिक्र अक्सर वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों में होता रहता है। एक तरफ, भारतीय रुपया भारत की आर्थिक शक्ति और वित्तीय स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व करता है, वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर दुनिया की सबसे शक्तिशाली मुद्राओं में से एक है, जिसका व्यापक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्त में उपयोग होता है। इन दोनों मुद्राओं के बीच तुलनात्मक अध्ययन न केवल भारत की आर्थिक स्थिति को समझने में मदद करता है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में रुपये की भूमिका को भी स्पष्ट करता है। इस लेख में, हम रुपये और डॉलर के बीच के संबंध, उनके ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव, और इन मुद्राओं को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषण करेंगे, ताकि एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्राप्त किया जा सके।   रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर : क्यों गिर रहा है भारतीय रुपया ? 13 जनवरी 2024, सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 23 पैसे गिरकर 86.27 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया। यह भारतीय मुद्रा के इतिहास में सबसे कम मूल्य है। र...

मेरे मन की बात: क्या 1992 का घोटाला एक मिथक है?

  मेरे मन की बात: क्या 1992 का घोटाला एक मिथक है? 1992 का घोटाला ... आज भी यह शब्द सुनते ही कई लोगों के मन में खलबली मच जाती है। ये घोटाला , एक ऐसा दौर था जहाँ भारतीय शेयर बाजार की तस्वीर ही बदल गई थी। और इस बदलाव के केंद्र में थे हर्षद मेहता , जिन्हें ' बिग बुल ' और शेयर बाजार का अमिताभ बच्चन भी कहा जाता था।  1992 का शेयर बाजार घोटाला , कुछ लोग इसे एक गंभीर अपराध मानते हैं , जबकि कुछ इसे एक मिथक या एक अतिरंजित कहानी मानते हैं। इस लेख में , हम इस विवादित मुद्दे पर गहराई से विचार करेंगे और यह समझने की कोशिश करेंगे कि क्या वास्तव में 1992 का घोटाला , जैसा कि हमें बताया गया है , वैसा ही था या इसमें कोई और सच्चाई भी छिपी हुई है। शेयर बाजार में क्रांति : हर्षद मेहता का उदय हर्षद मेहता , एक ऐसा नाम जो भारतीय शेयर बाजार में क्रांति का प्रतीक बन गया। एक ऐसा समय था जब भारतीय शेयर बाजार अपनी धीमी गति के लिए जाना जाता था। यह एक कछुए की...